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ramayan 4.25.17: 'तार! तुम जल्दी जाओ और एक पालकी ले आओ; क्योंकि इस समय अधिक फुर्ती की आवश्यकता है। ऐसे अवसरों पर यही लाभदायक है।'   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.25.17 
त्वं तार शिबिकां शीघ्रमादायागच्छ सम्भ्रमात्।
त्वरा गुणवती युक्ता ह्यस्मिन् काले विशेषत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'तार! तुम जल्दी जाओ और एक पालकी ले आओ; क्योंकि इस समय अधिक फुर्ती की आवश्यकता है। ऐसे अवसरों पर यही लाभदायक है।'
 
‘Tar! You go quickly and bring a palanquin; because at this time more agility is required. That is beneficial on such occasions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)