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ramayan 4.25.1: लक्ष्मण सहित श्री रामचन्द्रजी भी सुग्रीव आदि के दुःख से उन्हीं के समान दुःखी हुए। सुग्रीव, अंगद और तारा को सान्त्वना देते हुए उन्होंने इस प्रकार कहा-॥1॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.25.1 
स सुग्रीवं च तारां च साङ्गदां सहलक्ष्मण:।
समानशोक: काकुत्स्थ: सान्त्वयन्निदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण सहित श्री रामचन्द्रजी भी सुग्रीव आदि के दुःख से उन्हीं के समान दुःखी हुए। सुग्रीव, अंगद और तारा को सान्त्वना देते हुए उन्होंने इस प्रकार कहा-॥1॥
 
Shri Ramchandraji along with Laxman were as saddened by the grief of Sugriva etc. as him. While consoling Sugriva, Angad and Tara, he said thus -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)