Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.24.40: मैं दुःखी और अनाथ हूँ। मैं अपने पति से वियोग में हूँ। ऐसी दशा में मुझे जीवित छोड़ना आपके लिए उचित नहीं है। हे प्रभु! मैं बुद्धिमान वानरों में श्रेष्ठ, सुन्दर एवं बहुमूल्य स्वर्णमाला से सुशोभित तथा हाथियों के राजा की चाल से चलने वाले वालि के बिना अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकूँगी।॥40॥ | ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्तामनाथामपनीयमाना-
मेवंगतां नार्हसि मामहन्तुम्।
अहं हि मातङ्गविलासगामिना
प्लवंगमानामृषभेण धीमता।
विना वरार्होत्तमहेममालिना
चिरं न शक्ष्यामि नरेन्द्र जीवितुम्॥ ४०॥
अनुवाद
मैं दुःखी और अनाथ हूँ। मैं अपने पति से वियोग में हूँ। ऐसी दशा में मुझे जीवित छोड़ना आपके लिए उचित नहीं है। हे प्रभु! मैं बुद्धिमान वानरों में श्रेष्ठ, सुन्दर एवं बहुमूल्य स्वर्णमाला से सुशोभित तथा हाथियों के राजा की चाल से चलने वाले वालि के बिना अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकूँगी।॥40॥
I am unhappy and orphaned. I have been separated from my husband. It is not proper for you to leave me alive in such a condition. O Lord! I will not be able to live for long without Vali, the best of the intelligent monkeys, who is adorned with a beautiful and precious golden garland and moves with the gait of a king of elephants.'॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥