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ramayan 4.24.28: वे राजा के योग्य शुभ लक्षणों से युक्त थे। उनके नेत्र अत्यंत मनोहर थे। उस महापुरुष श्री राम को, जिन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा था, देखकर मृग-शावक के समान नेत्रों वाली तारा समझ गई कि वे ककुत्स्थ कुल के साक्षात् श्री राम हैं।   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.24.28 
सुसंवृतं पार्थिवलक्षणैश्च
तं चारुनेत्रं मृगशावनेत्रा।
अदृष्टपूर्वं पुरुषप्रधान-
मयं स काकुत्स्थ इति प्रजज्ञे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वे राजा के योग्य शुभ लक्षणों से युक्त थे। उनके नेत्र अत्यंत मनोहर थे। उस महापुरुष श्री राम को, जिन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा था, देखकर मृग-शावक के समान नेत्रों वाली तारा समझ गई कि वे ककुत्स्थ कुल के साक्षात् श्री राम हैं।
 
He was blessed with the auspicious features befitting a king. His eyes were very charming. Seeing that great man Shri Ram, whom she had never seen before, Tara, who had the eyes of a deer-cub, understood that he was the very person of the Kakutstha clan, Shri Ram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)