Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.24.23: 'राजन्! यदि मैं मर भी जाऊँ, तो भी आपके सारे कार्य सिद्ध हो जाएँगे। मैं कुल का हत्यारा और अपराधी हूँ। अतः मैं इस संसार में रहने के योग्य नहीं हूँ। अतः हे श्री राम! मुझे प्राण त्यागने की अनुमति दीजिए।'॥23॥   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.24.23 
कृत्स्नं तु ते सेत्स्यति कार्यमेत-
न्मय्यप्यतीते मनुजेन्द्रपुत्र।
कुलस्य हन्तारमजीवनार्हं
रामानुजानीहि कृतागसं माम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! यदि मैं मर भी जाऊँ, तो भी आपके सारे कार्य सिद्ध हो जाएँगे। मैं कुल का हत्यारा और अपराधी हूँ। अतः मैं इस संसार में रहने के योग्य नहीं हूँ। अतः हे श्री राम! मुझे प्राण त्यागने की अनुमति दीजिए।'॥23॥
 
‘Prince! Even if I die, all your work will be accomplished. I am a murderer of the clan and a criminal. Therefore, I am not fit to live in this world. Therefore, Shri Ram! Please give me permission to give up my life.'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)