Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.24.11: जब वालि ने मुझे वृक्ष की एक शाखा से घायल कर दिया और मैं दो घण्टे तक कराहता रहा, तब उसने मुझे सान्त्वना देते हुए कहा - 'जाओ, मुझसे फिर युद्ध करने की इच्छा मत करो।'॥11॥ | ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रुमशाखावभग्नोऽहं मुहूर्तं परिनिष्टनन्।
सान्त्वयित्वा त्वनेनोक्तो न पुन: कर्तुमर्हसि॥ ११॥
अनुवाद
जब वालि ने मुझे वृक्ष की एक शाखा से घायल कर दिया और मैं दो घण्टे तक कराहता रहा, तब उसने मुझे सान्त्वना देते हुए कहा - 'जाओ, मुझसे फिर युद्ध करने की इच्छा मत करो।'॥11॥
When Vali injured me with a branch of a tree and I was groaning for two hours, then he consoled me and said - 'Go, do not wish to fight with me again.'॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥