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ramayan 4.22.9: वह मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय है। मेरी अनुपस्थिति में तुम उसे अपने पुत्र के समान समझो। उसे किसी भी प्रकार की सुख-सुविधा की कमी न होने दो और सर्वत्र उसकी रक्षा करते रहो॥9॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.22.9 
मम प्राणै: प्रियतरं पुत्रं पुत्रमिवौरसम्।
मया हीनमहीनार्थं सर्वत: परिपालय॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय है। मेरी अनुपस्थिति में तुम उसे अपने पुत्र के समान समझो। उसे किसी भी प्रकार की सुख-सुविधा की कमी न होने दो और सर्वत्र उसकी रक्षा करते रहो॥9॥
 
‘He is dearer to me than my life. In my absence, you should treat him like your own son. Do not let him lack any comforts and keep protecting him everywhere.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)