Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.22.8: देखो, मेरा पुत्र अंगद भूमि पर पड़ा है। उसका मुख आँसुओं से भीगा हुआ है। वह सुख-सुविधाओं में पला-बढ़ा है और सुख-सुविधाओं का अधिकारी है। बालक होने पर भी वह मूर्ख नहीं है॥8॥ | ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देखो, मेरा पुत्र अंगद भूमि पर पड़ा है। उसका मुख आँसुओं से भीगा हुआ है। वह सुख-सुविधाओं में पला-बढ़ा है और सुख-सुविधाओं का अधिकारी है। बालक होने पर भी वह मूर्ख नहीं है॥8॥
‘Look, my son Angad is lying on the ground. His face is wet with tears. He has been brought up in comfort and deserves to enjoy comfort. Even though he is a child, he is not foolish.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥