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ramayan 4.22.6: मैं अपने प्राण, राज्य, अपार धन और यश का तुरंत त्याग कर रहा हूँ॥6॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.22.6 
जीवितं च हि राज्यं च श्रियं च विपुलां तथा।
प्रजहाम्येष वै तूर्णमहं चागर्हितं यश:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने प्राण, राज्य, अपार धन और यश का तुरंत त्याग कर रहा हूँ॥6॥
 
I am immediately renouncing my life, kingdom, immense wealth and acclaimed fame.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)