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ramayan 4.22.30: तत्पश्चात् जब सोलहवाँ वर्ष आरम्भ हुआ, तब वालि के हाथों गोलभ मारा गया। जिस दुष्ट गन्धर्व को मारकर हमें रक्षा का वरदान दिया था, उसी भयंकर दाँत वाले वालि ने हमारे स्वामी वानरराज को कैसे मार डाला?॥30॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.22.30 
तत: षोडशमे वर्षे गोलभो विनिपातित:।
तं हत्वा दुर्विनीतं तु वाली दंष्ट्राकरालवान्।
सर्वाभयंकरोऽस्माकं कथमेष निपातित:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब सोलहवाँ वर्ष आरम्भ हुआ, तब वालि के हाथों गोलभ मारा गया। जिस दुष्ट गन्धर्व को मारकर हमें रक्षा का वरदान दिया था, उसी भयंकर दाँत वाले वालि ने हमारे स्वामी वानरराज को कैसे मार डाला?॥30॥
 
‘Thereafter, when the sixteenth year began, Golabha was killed at the hands of Vaali. How was our master, the monkey king himself killed by the Vaali with fierce teeth, who had killed that evil Gandharva and had given us the boon of protection?’॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)