श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.22.21 
यथा हि त्वं महाबाहो लालित: सततं मया।
न तथा वर्तमानं त्वां सुग्रीवो बहु मन्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! यदि तुम मेरा स्नेह पाकर भी अब इसी प्रकार आचरण करोगे, तो सुग्रीव तुम्हारा अधिक आदर नहीं करेंगे॥ 21॥
 
Mahabaho! If you continue to behave the same way even now after receiving my affection, then Sugreeva will not respect you much.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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