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ramayan 4.22.19: वह स्वर्ण-माला सुग्रीव को देकर वालि ने प्राण त्यागने का निश्चय किया, फिर सामने खड़े अपने पुत्र अंगद की ओर देखकर स्नेहपूर्वक बोली -॥19॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.22.19 
तां मालां काञ्चनीं दत्त्वा दृष्ट्वा चैवात्मजं स्थितम्।
संसिद्ध: प्रेत्यभावाय स्नेहादङ्गदमब्रवीत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह स्वर्ण-माला सुग्रीव को देकर वालि ने प्राण त्यागने का निश्चय किया, फिर सामने खड़े अपने पुत्र अंगद की ओर देखकर स्नेहपूर्वक बोली -॥19॥
 
After giving that golden garland to Sugreeva, Vali decided to die. Then looking at her son Angad standing in front of her she said with affection -॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)