Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.22.18: बालि के वचनों से सुग्रीव का क्रोध शांत हो गया। वह सावधान हो गया और उचित आचरण करने लगा। अपने भाई की अनुमति से उसने स्वर्ण माला स्वीकार कर ली। | ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बालि के वचनों से सुग्रीव का क्रोध शांत हो गया। वह सावधान हो गया और उचित आचरण करने लगा। अपने भाई की अनुमति से उसने स्वर्ण माला स्वीकार कर ली।
Sugreeva's hostility was calmed by Vali's words. He became cautious and started behaving properly. With his brother's permission, he accepted the golden garland.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥