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ramayan 4.22.17: जब बालि ने भ्रातृ-स्नेह से ये शब्द कहे, तब सुग्रीव ने उसके वध से जो हर्ष अनुभव किया था, वह त्याग दिया और पुनः दुःखी हो गया, मानो चन्द्रमा पर ग्रहण लग गया हो।   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.22.17 
इत्येवमुक्त: सुग्रीवो वालिना भ्रातृसौहृदात्।
हर्षं त्यक्त्वा पुनर्दीनो ग्रहग्रस्त इवोडुराट्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब बालि ने भ्रातृ-स्नेह से ये शब्द कहे, तब सुग्रीव ने उसके वध से जो हर्ष अनुभव किया था, वह त्याग दिया और पुनः दुःखी हो गया, मानो चन्द्रमा पर ग्रहण लग गया हो।
 
When Vali said these words out of brotherly affection, Sugreeva gave up the joy he had felt on account of her killing and became sad again, as if an eclipse had fallen on the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)