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ramayan 4.22.16: सुग्रीव! कृपया मेरा यह दिव्य स्वर्ण हार धारण करें। इसमें दानशील देवी लक्ष्मी निवास करती हैं। यदि मैं मर जाऊँगा, तो इसका धन नष्ट हो जाएगा। अतः इसे अभी धारण करें।॥16॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.22.16 
इमां च मालामाधत्स्व दिव्यां सुग्रीव काञ्चनीम्।
उदारा श्री: स्थिता ह्यस्यां सम्प्रजह्यान्मृते मयि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! कृपया मेरा यह दिव्य स्वर्ण हार धारण करें। इसमें दानशील देवी लक्ष्मी निवास करती हैं। यदि मैं मर जाऊँगा, तो इसका धन नष्ट हो जाएगा। अतः इसे अभी धारण करें।॥16॥
 
Sugreeva! Please wear this divine golden necklace of mine. The generous goddess Lakshmi resides in it. If I die, its wealth will be destroyed. So wear it right now.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)