श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.22.13 
सुषेणदुहिता चेयमर्थसूक्ष्मविनिश्चये।
औत्पातिके च विविधे सर्वत: परिनिष्ठिता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह सुषेण की पुत्री तारा सूक्ष्म विषयों का निर्णय करने में तथा नाना प्रकार की विपत्तियों के लक्षण समझने में निपुण है॥13॥
 
This Tara, the daughter of Sushen, is adept in making judgements on minute matters and understanding the signs of various kinds of calamities.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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