| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 20: तारा का विलाप » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 4.20.8  | यान्यस्माभिस्त्वया सार्धं वनेषु मधुगन्धिषु।
विहृतानि त्वया काले तेषामुपरम: कृत:॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | हमने तुम्हारे साथ मधुर-सुगंधित वनों में जो-जो विहार किए हैं, उन सबका तुमने अब सदा के लिए अन्त कर दिया है ॥8॥ | | | | All the walks we have done with you in the sweet-scented forests, you have now ended them all forever. ॥ 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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