श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 20: तारा का विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.20.5 
उत्तिष्ठ हरिशार्दूल भजस्व शयनोत्तमम्।
नैवंविधा: शेरते हि भूमौ नृपतिसत्तमा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! उठो और किसी अच्छे बिस्तर पर शरण लो। तुम्हारे जैसा महान राजा भूमि पर नहीं सोता।
 
O best of the monkeys! Get up and take shelter on a good bed. A great king like you does not sleep on the ground.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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