| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 20: तारा का विलाप » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 4.20.22  | किं मामेवं प्रलपतीं प्रियां त्वं नाभिभाषसे।
इमा: पश्य वरा बाह्वॺो भार्यास्ते वानरेश्वर॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | (तब उसने वालि से कहा-) 'वानरेश्वर! मैं आपकी प्रिय पत्नी हूँ और इस प्रकार रो-रोकर विलाप कर रही हूँ, फिर भी आप मुझसे क्यों नहीं बोलते? देखिए, आपकी अनेक सुंदर पत्नियाँ यहाँ उपस्थित हैं॥ 22॥ | | | | (Then she said to Vali-)'Vanareshwar! I am your beloved wife and I am crying and wailing like this, still why don't you speak to me? Look, many of your beautiful wives are present here'॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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