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श्लोक 4.20.19  |
समाश्वासय पुत्रं त्वं संदेशं संदिशस्व मे।
मूर्ध्न्नि चैनं समाघ्राय प्रवासं प्रस्थितो ह्यसि॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| प्राणनाथ! आप दूसरे देश जा रहे हैं। अपने पुत्र का माथा सूंघकर उसे धैर्य प्रदान करें तथा मुझे भी कुछ संदेश दें॥19॥ |
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| Praananath! You are going to another country. Smell your son's forehead and give him patience and also give me some message.॥ 19॥ |
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