श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 20: तारा का विलाप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.20.19 
समाश्वासय पुत्रं त्वं संदेशं संदिशस्व मे।
मूर्ध्न्नि चैनं समाघ्राय प्रवासं प्रस्थितो ह्यसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्राणनाथ! आप दूसरे देश जा रहे हैं। अपने पुत्र का माथा सूंघकर उसे धैर्य प्रदान करें तथा मुझे भी कुछ संदेश दें॥19॥
 
Praananath! You are going to another country. Smell your son's forehead and give him patience and also give me some message.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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