श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  4.2.9-10 
एवमेकायनगता: प्लवमाना गिरेर्गिरिम्।
प्रकम्पयन्तो वेगेन गिरीणां शिखराणि च॥ ९॥
तत: शाखामृगा: सर्वे प्लवमाना महाबला:।
बभञ्जुश्च नगांस्तत्र पुष्पितान् दुर्गमाश्रितान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर कूदते हुए और अपने वेग से पर्वतों की चोटियों को हिलाते हुए वे सभी महाबली वानर एक मार्ग पर पहुँचे। उछल-कूद करते हुए उन्होंने दुर्गम स्थानों पर स्थित पुष्पों से सुशोभित अनेक वृक्षों को तोड़ डाला॥9-10॥
 
In this manner, jumping from one mountain to another and shaking the peaks of the mountains with their speed, all those mighty monkeys reached one path. By jumping and jumping, they broke down many trees adorned with flowers that were situated in inaccessible places.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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