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श्लोक 4.2.26  |
ममैवाभिमुखं स्थित्वा पृच्छ त्वं हरिपुङ्गव।
प्रयोजनं प्रवेशस्य वनस्यास्य धनुर्धरौ॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| हे वानरशिरोमणि! तुम मेरे सामने खड़े होकर उन वीर धनुर्धरों से इस वन में प्रवेश करने का कारण पूछो॥ 26॥ |
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| O Vanarashiromaane! You stand facing me and ask those brave archers the reason for entering this forest.॥ 26॥ |
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