Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.2.24: अतः कपिश्रेष्ठ! तुम भी यहाँ से साधारण मनुष्य की भाँति जाओ और उनके हाव-भाव, रूप और बातचीत के ढंग से उन दोनों का वास्तविक परिचय प्राप्त करो॥24॥   |   ramayan सर्ग 4.2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.2.24 
तौ त्वया प्राकृतेनेव गत्वा ज्ञेयौ प्लवंगम।
इङ्गितानां प्रकारैश्च रूपव्याभाषणेन च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः कपिश्रेष्ठ! तुम भी यहाँ से साधारण मनुष्य की भाँति जाओ और उनके हाव-भाव, रूप और बातचीत के ढंग से उन दोनों का वास्तविक परिचय प्राप्त करो॥24॥
 
So Kapishrestha! You too go from here like an ordinary man and get a real introduction to both of them from their gestures, looks and manner of conversation. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)