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ramayan 4.2.20: "इन दोनों वीरों की भुजाएँ लम्बी और आँखें बड़ी हैं। ये धनुष-बाण और तलवार लिए हुए देवपुत्रों जैसे प्रतीत होते हैं। इन दोनों को देखकर किसका हृदय भय से नहीं भर जाएगा?"   |   ramayan सर्ग 4.2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.2.20 
दीर्घबाहू विशालाक्षौ शरचापासिधारिणौ।
कस्य न स्याद् भयं दृष्ट्वा ह्येतौ सुरसुतोपमौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"इन दोनों वीरों की भुजाएँ लम्बी और आँखें बड़ी हैं। ये धनुष-बाण और तलवार लिए हुए देवपुत्रों जैसे प्रतीत होते हैं। इन दोनों को देखकर किसका हृदय भय से नहीं भर जाएगा?"
 
‘These two heroes have long arms and big eyes. They look like sons of the gods, carrying bows, arrows and swords. Whose heart will not be filled with fear on seeing these two?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)