श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.2.1 
तौ तु दृष्ट्वा महात्मानौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
वरायुधधरौ वीरौ सुग्रीव: शङ्कितोऽभवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री राम और लक्ष्मण भाइयों को वीर वेश में, उत्तम अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर (ऋष्यमूक पर्वत पर बैठे हुए) आते देखकर सुग्रीव के मन में बड़ी शंका हुई॥1॥
 
Seeing Mahatma Shri Ram and Lakshman brothers coming in brave attire, armed with excellent weapons (sitting on Rishyamook mountain), Sugriva got very suspicious in his mind. 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd