श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.19.8 
वानरा राजसिंहस्य यस्य यूयं पुर:सरा:।
तं विहाय सुवित्रस्ता: कस्माद् द्रवत दुर्गता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों! तुम्हें उन राजसिंह योद्धाओं के आगे चलना था। अब तुम उन्हें छोड़कर बड़े भय और दुःख के साथ क्यों भाग रहे हो?॥8॥
 
‘O monkeys! You were supposed to walk ahead of those king-lion warriors. Now why are you leaving them and running away in great fear and misery?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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