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श्लोक 4.19.8  |
वानरा राजसिंहस्य यस्य यूयं पुर:सरा:।
तं विहाय सुवित्रस्ता: कस्माद् द्रवत दुर्गता:॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| हे वानरों! तुम्हें उन राजसिंह योद्धाओं के आगे चलना था। अब तुम उन्हें छोड़कर बड़े भय और दुःख के साथ क्यों भाग रहे हो?॥8॥ |
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| ‘O monkeys! You were supposed to walk ahead of those king-lion warriors. Now why are you leaving them and running away in great fear and misery?॥ 8॥ |
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