Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.19.27: फिर, मानो वह अभी-अभी नींद से जागी हो, अपने पति को, जो मृत्यु के पाश से बंधा हुआ था, देखकर, ‘हे आर्यपुत्र!’ कहकर रोने लगी।   |   ramayan सर्ग 4.19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.19.27 
सुप्तेव पुनरुत्थाय आर्यपुत्रेति वादिनी।
रुरोद सा पतिं दृष्ट्वा संवीतं मृत्युदामभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
फिर, मानो वह अभी-अभी नींद से जागी हो, अपने पति को, जो मृत्यु के पाश से बंधा हुआ था, देखकर, ‘हे आर्यपुत्र!’ कहकर रोने लगी।
 
Then, as if she had just woken up from sleep, she started crying saying, 'Oh, Aryaputra!' looking at her husband who was bound by the noose of death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)