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ramayan 4.19.21: आगे बढ़कर तारा ने देखा कि मेरे पति, जो युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाले राक्षस राजाओं को भी मारने में समर्थ थे, वानरराज की पृथ्वी पर लेटे हुए हैं ॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 4.19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.19.21 
सा व्रजन्ती ददर्शाथ पतिं निपतितं भुवि।
हन्तारं दानवेन्द्राणां समरेष्वनिवर्तिनाम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आगे बढ़कर तारा ने देखा कि मेरे पति, जो युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाले राक्षस राजाओं को भी मारने में समर्थ थे, वानरराज की पृथ्वी पर लेटे हुए हैं ॥ 21॥
 
Moving ahead, Tara saw that my husband, who was capable of killing even the demon kings who never turned their back in the war, was lying on the earth belonging to the monkey king. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)