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ramayan 4.17.7: पृथ्वी पर गिरकर भी वालि की स्वर्णमाला, उसका शरीर और हृदय के मर्म को छेदने वाला बाण- ये तीनों अलग-अलग तीन भागों में बँटे हुए अंगलक्ष्मी की शोभा का आनन्द ले रहे थे॥7॥   |   ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.17.7 
तस्य माला च देहश्च मर्मघाती च य: शर:।
त्रिधेव रचिता लक्ष्मी: पतितस्यापि शोभते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर गिरकर भी वालि की स्वर्णमाला, उसका शरीर और हृदय के मर्म को छेदने वाला बाण- ये तीनों अलग-अलग तीन भागों में बँटे हुए अंगलक्ष्मी की शोभा का आनन्द ले रहे थे॥7॥
 
Even after falling on the earth, Vali's golden garland, her body and the arrow that pierced the heart's core - all these three were separately enjoying the beauty of Angalakshmi, divided into three parts. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)