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ramayan 4.17.6: उस स्वर्ण-माला से विभूषित वह वीर वानरराज संध्या की लालिमा से रंगे हुए प्रदेश में मेघ के समान शोभा पा रहा था।   |   ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.17.6 
स तया मालया वीरो हैमया हरियूथप:।
संध्यानुगतपर्यन्त: पयोधर इवाभवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस स्वर्ण-माला से विभूषित वह वीर वानरराज संध्या की लालिमा से रंगे हुए प्रदेश में मेघ के समान शोभा पा रहा था।
 
Adorned with that golden garland, the brave monkey-king looked as beautiful as a cloud-cloud in the region coloured by the redness of the evening.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)