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ramayan 4.17.41: मेरी पत्नी तारा अन्तर्यामी है। उसने मुझे सत्य और हितकर बातें बताई थीं। किन्तु आसक्ति के कारण मैंने उसकी बात का उल्लंघन किया और मृत्यु को प्राप्त हुआ ॥41॥   |   ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.17.41 
तारया वाक्यमुक्तोऽहं सत्यं सर्वज्ञया हितम्।
तदतिक्रम्य मोहेन कालस्य वशमागत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
मेरी पत्नी तारा अन्तर्यामी है। उसने मुझे सत्य और हितकर बातें बताई थीं। किन्तु आसक्ति के कारण मैंने उसकी बात का उल्लंघन किया और मृत्यु को प्राप्त हुआ ॥41॥
 
My wife Tara is omniscient. She had told me the truth and what was beneficial. But due to attachment, I violated her advice and became subject to death. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)