Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.17.22: 'परन्तु आज मुझे ज्ञात हुआ कि तुम अपनी बुद्धि खो चुके हो। तुम धर्मांध हो। तुम धर्म का वेश केवल दिखावे के लिए धारण करते हो। वास्तव में तुम अधार्मिक हो। तुम्हारा आचरण पापमय है। तुम भूसे से ढके हुए कुएँ के समान कपटी हो॥ 22॥ | ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वां विनिहतात्मानं धर्मध्वजमधार्मिकम्।
जाने पापसमाचारं तृणै: कूपमिवावृतम्॥ २२॥
अनुवाद
'परन्तु आज मुझे ज्ञात हुआ कि तुम अपनी बुद्धि खो चुके हो। तुम धर्मांध हो। तुम धर्म का वेश केवल दिखावे के लिए धारण करते हो। वास्तव में तुम अधार्मिक हो। तुम्हारा आचरण पापमय है। तुम भूसे से ढके हुए कुएँ के समान कपटी हो॥ 22॥
‘But today I have come to know that you have lost your wisdom. You are a religious fanatic. You wear the garb of religion only for show. In reality you are irreligious. Your conduct is sinful. You are as deceptive as a well covered with straw.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥