श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.16.20 
एष मुष्टिर्महान् बद्धो गाढ: सुनियताङ्गुलि:।
मया वेगविमुक्तस्ते प्राणानादाय यास्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! देखो! यह विशाल मुट्ठी कसकर बंद है। इसमें सभी उंगलियाँ एक-दूसरे से संयमित ढंग से जुड़ी हुई हैं। मेरा यह प्रबल प्रहार अवश्य ही तुम्हारे प्राण हर लेगा।'
 
Sugreeva! Look. This huge fist is tightly clenched. All the fingers in it are tightly joined to each other in a controlled manner. This punch thrown by me with great force will surely take your life.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)