श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  4.14.7-8h 
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा सुग्रीवेण स राघव:॥ ७॥
तमेवोवाच वचनं सुग्रीवं शत्रुसूदन:।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ऐसा कहने पर शत्रुसूदन धर्मात्मा श्रीरघुनाथ जी ने अपना पूर्व कथन दोहराते हुए पुनः सुग्रीव से कहा-॥ 7 1/2॥
 
On Sugriva saying this, Shatrusudan Dharmatma Shri Raghunath ji again said to Sugriva while reiterating his earlier statement -॥ 7 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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