Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.35-36: जिसे रक्षा का वरदान प्राप्त हो, उसे मारना घोर पाप है; यह महापाप है। इस समय मैं, लक्ष्मण और सुन्दरी सीता, तीनों आपके अधीन हैं। इस वन में आप ही हमारे एकमात्र आश्रय हैं; अतः हे वानरराज! आप संदेह न करें; पुनः जाकर युद्ध आरम्भ करें। | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दत्ताभयवधो नाम पातकं महदद्भुतम्।
अहं च लक्ष्मणश्चैव सीता च वरवर्णिनी॥ ३५॥
त्वदधीना वयं सर्वे वनेऽस्मिन् शरणं भवान्।
तस्माद् युध्यस्व भूयस्त्वं मा माशङ्कीश्च वानर॥ ३६॥
अनुवाद
जिसे रक्षा का वरदान प्राप्त हो, उसे मारना घोर पाप है; यह महापाप है। इस समय मैं, लक्ष्मण और सुन्दरी सीता, तीनों आपके अधीन हैं। इस वन में आप ही हमारे एकमात्र आश्रय हैं; अतः हे वानरराज! आप संदेह न करें; पुनः जाकर युद्ध आरम्भ करें।
‘It is a grave sin to kill someone who has been given the boon of protection; this is a great sin. At this time, I, Lakshmana and beautiful Sita are all under your control. You are our only refuge in this forest; therefore, O monkey king! Do not doubt; go again and start the war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥