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ramayan 4.12.13: सुग्रीव! हम शीघ्र ही यहाँ से किष्किन्धा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। तुम आगे बढ़ो और जिसे व्यर्थ ही भाई कहा जा रहा है, उसे युद्ध के लिए ललकारो।॥13॥   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.12.13 
अस्माद‍्गच्छाम किष्किन्धां क्षिप्रं गच्छ त्वमग्रत:।
गत्वा चाह्वय सुग्रीव वालिनं भ्रातृगन्धिनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! हम शीघ्र ही यहाँ से किष्किन्धा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। तुम आगे बढ़ो और जिसे व्यर्थ ही भाई कहा जा रहा है, उसे युद्ध के लिए ललकारो।॥13॥
 
Sugreeva! We are soon leaving this place for Kishkinda. You go ahead and challenge the one who is being called a brother in vain to a battle.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)