श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 99-100
 
 
श्लोक  4.1.99-100 
अधिकं शोभते पम्पा विकूजद्भिर्विहंगमै:॥ ९९॥
दीपयन्तीव मे कामं विविधा मुदिता द्विजा:।
श्यामां चन्द्रमुखीं स्मृत्वा प्रियां पद्मनिभेक्षणाम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
यह पम्पा पक्षियों के कलरव से अत्यन्त सुशोभित है। ये नाना प्रकार के पक्षी हर्षित होकर सीता के प्रति मेरे प्रेम को जागृत करते हैं; क्योंकि उनकी पुकार सुनकर मुझे अपनी प्रिय सीता का स्मरण हो आता है, जो युवा, कमल-नेत्रों वाली तथा चन्द्रमुख वाली थी।॥ 99-100॥
 
‘This Pampa is greatly adorned by the chirping of birds. These birds of various kinds, immersed in joy, kindle my love for Sita; for on hearing their call I am reminded of my beloved Sita, who was young and had lotus-eyed eyes and was moon-faced.॥ 99-100॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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