श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  4.1.97 
अमी हि विविधै: पुष्पैस्तरवो विविधच्छदा:।
काननेऽस्मिन् विना कान्तां चिन्तामुत्पादयन्ति मे॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
'इस वन में नाना प्रकार के पुष्पों से सुशोभित तथा नाना प्रकार के पुष्पों से सुशोभित ये वृक्ष, प्राणवल्लभा सीता के बिना मेरे मन में चिन्ता उत्पन्न करते हैं।
 
‘In this forest, these trees decorated with different types of flowers and decorated with different types of flowers, without Pranavallabha Sita, they create worry in my mind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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