श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  4.1.96 
न ह्येवं रमणीयेषु शाद्वलेषु तया सह।
रमतो मे भवेच्चिन्ता न स्पृहान्येषु वा भवेत्॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
यदि मुझे हरी-भरी घासों से सुशोभित ऐसे सुन्दर प्रदेशों में सीता के साथ सुखपूर्वक विचरण करने का अवसर मिले, तो मुझे (अयोध्या का राज्य न मिलने के कारण) न तो कोई चिन्ता होगी और न अन्य दिव्य सुखों की ही इच्छा होगी॥ 96॥
 
If I get the opportunity to roam around happily with Sita in such beautiful regions adorned with green grass, then I will not have any anxiety (due to not getting the kingdom of Ayodhya) nor will I have any desire for other divine pleasures.॥ 96॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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