श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  4.1.95 
यदि दृश्येत सा साध्वी यदि चेह वसेमहि।
स्पृहयेयं न शक्राय नायोध्यायै रघूत्तम॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
हे रघुश्रेष्ठ लक्ष्मण! यदि हम पतिव्रता सीता को देखेंगे और उनके साथ यहीं रहने लगेंगे, तो न तो हमें इन्द्रलोक जाने की इच्छा होगी और न अयोध्या लौटने की।॥ 95॥
 
O best of Raghus, Lakshmana! If we see the virtuous Sita and if we start living here with her, then we will neither have the desire to go to Indraloka, nor to return to Ayodhya.॥ 95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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