श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  4.1.94 
मन्दाकिन्यास्तु यदिदं रूपमेतन्मनोरमम्।
स्थाने जगति विख्याता गुणास्तस्या मनोरमा:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
जब मन्दाकिनी के समान दिखने वाली पम्पा का ऐसा सुन्दर रूप है, तब उसके जो सुन्दर गुण संसार में प्रसिद्ध हैं, वे सब उचित ही हैं॥ 94॥
 
When Pampa, who appears like the Mandakini, has such a beautiful form, then the beautiful qualities which are famous in the world for her are justifiable.॥ 94॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd