श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  4.1.93 
एष कारण्डव: पक्षी विगाह्य सलिलं शुभम्।
रमते कान्तया सार्धं काममुद्दीपयन्निव॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
यह करण्डव पक्षी पम्पा नदी के स्वच्छ जल में प्रवेश करके अपनी प्रियतमा के साथ रमण कर रहा है और इस प्रकार कामवासना को उत्तेजित कर रहा है॥ 93॥
 
This Karandava bird, having entered the clean water of the Pampa river, is enjoying the company of its beloved and thus is stimulating sexual desire.॥ 93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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