श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  4.1.92 
आह्वयन्त इवान्योन्यं नगा: षट्पदनादिता:।
कुसुमोत्तंसविटपा: शोभन्ते बहु लक्ष्मण॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! वृक्ष अपनी ऊपरी शाखाओं पर पुष्पों के मुकुटों से सुसज्जित होकर अत्यन्त सुन्दर दिखाई दे रहे हैं और वे मधुमक्खियों के गुंजन से ऐसे कोलाहल कर रहे हैं मानो वे एक-दूसरे को पुकार रहे हों॥ 92॥
 
Lakshmana! The trees look very beautiful with crowns of flowers on their upper branches and they are becoming so noisy with the humming of the bees, as if they are calling one another.॥ 92॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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