श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  4.1.91 
हिमान्ते पश्य सौमित्रे वृक्षाणां पुष्पसम्भवम्।
पुष्पमासे हि तरव: संघर्षादिव पुष्पिता:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
सुमित्राकुमार ! वसन्त ऋतु में वृक्षों पर खिले हुए फूलों की शोभा देखो । इस चैत्र मास में ऐसा प्रतीत होता है मानो ये वृक्ष खिलने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हों ॥ 91॥
 
‘Sumitrakumar! Look at the splendour of the flowers on trees in the spring season. In this month of Chaitra, it seems as if these trees are competing with each other to bloom.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)