श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  4.1.90 
विविधा विविधै: पुष्पैस्तैरेव नगसानुषु।
विस्तीर्णा: पीतरक्ताभा: सौमित्रे प्रस्तरा: कृता:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! पर्वत शिखरों पर विशाल शिलाओं पर गिरे हुए नाना प्रकार के पुष्पों के कारण वे लाल और पीले रंग की क्यारियों के समान प्रतीत हो रहे हैं॥ 90॥
 
Sumitra Nandan! The various kinds of flowers that have fallen on the huge rocks on the mountain peaks have made them look like beds of red and yellow colour.॥ 90॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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