श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.1.9 
पुष्पभारसमृद्धानि शिखराणि समन्तत:।
लताभि: पुष्पिताग्राभिरुपगूढानि सर्वत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर के वृक्षों के शीर्ष पुष्पों से भरे हुए और पुष्पों से लदे हुए प्रतीत होते हैं। चारों ओर से फूली हुई लताएँ उनसे लिपटी हुई हैं॥9॥
 
‘The tops of the trees all around appear to be full of flowers and are laden with flowers. The blooming creepers are wrapped around them from all sides.॥ 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd