श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 83-84h
 
 
श्लोक  4.1.83-84h 
पुष्पितान् पुष्पिताग्राभिर्लताभि: परिवेष्टितान्॥ ८३॥
द्रुमान् पश्येह सौमित्रे पम्पाया रुचिरान् बहून्।
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! इन सुन्दर और असंख्य पम्पा वृक्षों को देखो, जिनके अग्रभाग पुष्पों से लदे हुए हैं, लताओं और बेलों से लिपटे हुए हैं। ये सभी यहाँ पुष्पों के भार से लदे हुए हैं।
 
Sumitra Nandan! Look at these beautiful and numerous Pampa trees whose front parts are full of flowers, wrapped in creepers and creepers. All of them are laden with the weight of flowers here. 83 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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