श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  4.1.79 
पद्मकाश्चैव शोभन्ते नीलाशोकाश्च पुष्पिता:।
लोध्राश्च गिरिपृष्ठेषु सिंहकेसरपिञ्जरा:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
पर्वत का पिछला भाग खिले हुए नीले अशोक पुष्पों और पद्मक पुष्पों से सुशोभित है। सिंह के अयाल के समान लाल रंग के लोध्र पुष्प भी सुन्दर लगते हैं। 79.
 
‘The back of the mountain is adorned with the blooming blue Ashoka flowers and the Padmaka flowers. The red coloured Lodhra flowers, like the mane of a lion, also look beautiful. 79.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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