श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  4.1.77 
केतक्य: सिन्दुवाराश्च वासन्त्यश्च सुपुष्पिता:।
माधव्यो गन्धपूर्णाश्च कुन्दगुल्माश्च सर्वश:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
केतकी (केवड़ा), सिन्दुवार और वासंती लताएँ भी सुन्दर पुष्पों से भरी हुई हैं! सुगन्धित माधवी लता और कुन्द-पुष्प की झाड़ियाँ सर्वत्र शोभायमान हो रही हैं॥ 77॥
 
‘The Ketaki (Kevada), Sinduwar and Vasanti creepers are also full of beautiful flowers! The fragrant Madhavi creeper and the Kunda-flower bushes are looking beautiful everywhere.॥ 77॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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