श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  4.1.74 
अधिकं शैलराजोऽयं धातुभिस्तु विभूषित:।
विचित्रं सृजते रेणुं वायुवेगविघट्टितम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार की धातुओं से सुशोभित यह पर्वतराज ऋषिमूक वायु के बल से उत्पन्न विचित्र धूलि उत्पन्न कर रहा है।
 
This king of mountains, adorned with various metals, is creating strange dust brought by the force of the Rishimuka wind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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